देहरादून। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम, उत्तराखण्ड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के पाँचवें दिन परेड ग्राउंड, देहरादून में हजारों की संख्या में लोगों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ उत्तराखण्ड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर सहित कई गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे। हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक कलाओं और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित यह महोत्सव पूरे प्रदेश से आए आगंतुकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा।
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा, “छठे लोक संवर्धन पर्व में लोगों का उत्साह और ऊर्जा देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा का सच्चा उत्सव है। मैं आयोजकों को पिछले पाँच दिनों से इस भव्य आयोजन का सफल संचालन करने तथा जनसामान्य की अभूतपूर्व मांग को देखते हुए इसे सात दिनों तक विस्तारित करने के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। उत्तराखण्ड की महिलाएँ, विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ, अपने उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं और वर्षों के दौरान उनका कार्य कई गुना बढ़ा है। मैं सभी शिल्पकारों से आग्रह करता हूँ कि वे उत्कृष्टता और नवाचार के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाते रहें। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को साकार करने में हम सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है और जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है, 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है।”
इस अवसर पर राज्यपाल ने पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक शिल्पकारों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान ड्राइंग प्रतियोगिता के परिणामों की भी घोषणा की गई। निष्ठा बिष्ट ने प्रथम, आरुषि सेमवाल ने द्वितीय तथा आराध्या सेमवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं क्राफ्ट प्रतियोगिता में आरुषि सेमवाल ने प्रथम, निदा मलिक ने द्वितीय तथा गरिमा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को सम्मानित भी किया गया। पाँचवें दिन का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध पंजाबी गायक, गीतकार एवं अभिनेता परमिश वर्मा की बहुप्रतीक्षित संगीत संध्या रही। उन्होंने अपनी दमदार मंचीय उपस्थिति और जोशीले प्रदर्शन से शुरुआत से ही दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘गाल नी कढ़नी’, ‘शादा’, ‘ले चक्क मैं आ गया’, ‘सब फेड जांगे’, ‘डायमंड दा छल्ला’ तथा ‘आम जेहे मुंडे’ जैसे सुपरहिट गीतों की प्रस्तुतियों ने पूरे परेड ग्राउंड को संगीत के रंग में रंग दिया।
परमिश वर्मा के लोकप्रिय गीतों पर हजारों दर्शक पूरी शाम झूमते और गुनगुनाते रहे। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति ने परेड ग्राउंड को संगीत और उत्साह के विराट उत्सव में बदल दिया, जहाँ परिवारों, युवाओं और प्रदेशभर से आए आगंतुकों ने महोत्सव की सबसे यादगार संध्याओं में से एक का आनंद लिया। इस अवसर पर आयोजकों ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि आगंतुकों के अभूतपूर्व उत्साह और लगातार मिल रही जन मांग को देखते हुए लोक संवर्धन पर्व को दो दिन के लिए बढ़ाकर अब 17 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
उत्तराखण्ड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर ने कहा, “देहरादून में आयोजित यह संस्करण ऐतिहासिक है क्योंकि किसी राज्य सरकार की सहभागिता से आयोजित होने वाला यह पहला लोक संवर्धन पर्व है। उत्तराखण्ड, प्रधानमंत्री विकास (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत इस प्रमुख आयोजन के आयोजन हेतु भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला पहला राज्य बना है। यह पहल पारंपरिक कला, शिल्प और पाक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को सशक्त बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आगंतुकों की अभूतपूर्व सहभागिता और हमारे शिल्पकारों को मिली सराहना ने इस आयोजन को वास्तव में यादगार बना दिया है।”
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की निदेशक दीप्ति सिंह ने कहा, “लोक संवर्धन पर्व को मिला जनसमर्थन हमारी सभी अपेक्षाओं से कहीं अधिक रहा है। इस सफलता का श्रेय प्रत्येक शिल्पकार, कारीगर, सांस्कृतिक कलाकार, विभाग, स्वयंसेवक और आयोजन से जुड़े प्रत्येक सदस्य को जाता है, जिन्होंने अथक परिश्रम से इस आयोजन को भव्य सफलता दिलाई। यहाँ सजे आकर्षक स्टॉलों और उत्कृष्ट हस्तशिल्प को आगंतुकों ने भरपूर सराहा है। इसी उत्साह को देखते हुए हमने महोत्सव को दो दिन और बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि अधिक से अधिक लोग भारत की विविध कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव कर सकें। साथ ही, राष्ट्रीय शोक के कारण 13 जुलाई को स्थगित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी अब किया जा सकेगा।”
विस्तारित कार्यक्रम के अंतर्गत 16 जुलाई को उत्तराखण्ड के प्रकृति, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व का विशेष आयोजन किया जाएगा। इसी दिन गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी तथा सुप्रसिद्ध लोकगायक किशन महिपाल की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा का भव्य उत्सव बनेंगी।
महोत्सव में देशभर से आए शिल्पकारों द्वारा लगाए गए 150 से अधिक हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक उत्पादों एवं क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल विस्तारित अवधि के दौरान भी आगंतुकों के लिए खुले रहेंगे। इससे कारीगरों और उद्यमियों को व्यापार, नेटवर्किंग तथा नए बाजारों तक पहुँच के अतिरिक्त अवसर प्राप्त होंगे, वहीं अधिक से अधिक लोग भारत की समृद्ध शिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कर सकेंगे। प्रतिदिन हजारों की संख्या में पहुँच रहे आगंतुकों के साथ लोक संवर्धन पर्व उत्तराखण्ड में पारंपरिक कला, शिल्प, संस्कृति और क्षेत्रीय व्यंजनों के सबसे बड़े आयोजनों में से एक बनकर उभरा है। यह महोत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा उसे जीवंत बनाए रखने वाले शिल्पकारों और कारीगरों के प्रति बढ़ते सम्मान और जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
राज्यपाल ने किया शिल्पकारों का सम्मान, उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का दिया संदेश