देहरादून। वित्त मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जो बजट पेश किया, उसमें आठ मूल मंत्रों को केंद्र में रखकर संतुलन साधा गया है। ये मूल मंत्र अंग्रेजी में संतुलन शब्द को सामने रखकर बने हैं, जिसके एक-एक अक्षर में गहरे अर्थ समाहित हैं। सरकार ने इसी हिसाब से विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट का प्रावधान किया है। अनूठे अंदाज में सरकार ने राज्य के विकास और उसकी प्रगति से जुड़ी मजबूत परिकल्पना को भी सामने रखा है।
दरअसल, राज्य सरकार ने बजट में हर वर्ग का ख्याल रखते हुए संतुलित बजट पेश किया है। विकास और प्रगति की सोच को जिस अंदाज में सामने रखा गया है, वह अनूठी है। सरकार ने संतुलन शब्द को अंग्रेजी के हिसाब से सामने रखते हुए एक-एक अक्षर पर विकास और प्रगति की तस्वीर खींची है। मसलन, संतुलन के पहले अक्षर एस से समावेशी विकास, ए से आत्मनिर्भरता, एन से नई सोच और टी से तीव्र विकास की परिकल्पना को न सिर्फ पेश किया है, बल्कि उसके अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और मदों में अच्छे खासे बजट का प्रावधान भी किया है। इसी तरह, यू अक्षर की जब बात की गई है, तो उसमें उत्तराखंड के उन्नत गांव एवं शहरों को ध्यान में रखा गया है। एल से लोकसहभागिता, ए से आर्थिक विकास और एन से न्यायपूर्ण व्यवस्था की परिकल्पना प्रकट की गई है और विभिन्न मदों में बजट का प्रावधान किया गया है।
बजट में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में समग्र रूप से लगभग रु 1327.73 करोड़, अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना हेतु रु 600.00 करोड़, सक्षम आंगनबाडी एण्ड पोषण 2.0 योजना हेतु समग्र रूप से लगभग रु 598.33 करोड़, ईडब्ल्यूएस आवासों हेतु अनुदान के अन्तर्गत रु 25.00 करोड़ का प्राविधान किया गया है। राज्य खाद्यान्न योजना के अन्तर्गत रू 25.00 करोड़, प्रधानमंत्री पोषण मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग रु 149.45 करोड,़ मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना हेतु रु 30.00 करोड़, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना हेतु रु 15.00 करोड़, राज्य में प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना हेतु समग्र रूप से लगभग रु 14.13 करोड़,
मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना हेतु लगभग रु 13.44 करोड़, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना हेतु रु 15.00 करोड़ और बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि के रूप में रु 8.00 करोड़ का प्राविधान किया गया है।
बजट में आठ मूल मंत्रों से सरकार ने साधा संतुलन