देहरादून। घ्सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान के बाल एवं नवजात शिशु विभाग ने चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्राचार्य डॉ चंद्र प्रकाश भैसोड़ा के प्रयासों से संस्थान की सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, विभाग में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है, जिससे बच्चों और नवजात शिशुओं के इलाज के लिए विशेषज्ञ सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो गई हैं।
घ्संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक और विभागाध्यक्ष (बाल रोग विभाग) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नवजात देखभाल के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. सुमित जीना (सह प्राध्यापक) ने 1 जून 2026 से संस्थान में कार्यभार ग्रहण कर लिया है, इसके अतिरिक्त, डॉ. ज्योति कांडपाल (सहायक प्राध्यापक) पहले से ही इस विभाग में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
घ्विभाग में वर्तमान सेवाएं और विस्तार योजना वर्तमान में बाल रोग विभाग में 06 विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं उनकी टीम द्वारा बाह्य रोग विभाग, अंतः रोग विभाग,नवजात एवं बाल गहन चिकित्सा इकाई , शिशु एवं बाल प्रतिरक्षण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं परामर्श सेवाएं, जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। विभाग में वर्तमान में गहन चिकित्सा इकाई की 22 शैय्याएं पूर्ण रूप से संचालित हैं। नए सुपर स्पेशियलिस्ट विशेषज्ञों की नियुक्ति के पश्चात, संस्थान ने अब इन सुविधाओं के विस्तार की योजना तैयार की है, जिससे उपचार की क्षमता में और अधिक वृद्धि होगी। घ्जनपद और आसपास के क्षेत्रों के लिए वरदान
इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति से न केवल अल्मोड़ा जनपद, बल्कि आसपास के पड़ोसी जनपदों के नवजात शिशुओ को भी बड़ी राहत मिलेगी। अब गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं और जटिल बाल रोगों के उपचार में नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है ,संस्थान में क्ड छमवदंजवसवहल विशेषज्ञों की उपलब्धता और गहन चिकित्सा इकाइयों के विस्तार से देखभाल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और शिशु एवं बाल मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी।घ्विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार सिंह ने इन नियुक्तियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राचार्य एवं संस्थान का निरंतर प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों को भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हों। घ्उन्होंने क्षेत्र की जनता से अपील की है कि वे नवजात शिशु एवं बाल रोगों से संबंधित समस्याओं के लिए इस विशेषज्ञ सुविधाओ का लाभ उठाएं। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में विभाग द्वारा एम बी बी एस के अतिरिक्त, एम डी पीडियाट्रिक्स के 4 चिकित्सक छात्र अध्ययनरत हैं, भविष्य में संस्थान में डी एम नियोनेटोलॉजी (सुपर स्पेशलाइजेशन के पाठ्यक्रम) की शुरुआत के लिए सुपर स्पेशियलिस्ट संकाय सदस्यों की नियुक्ति मील का पत्थर साबित होगी।