देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य गुरुदेव समयसागर जी महाराज की प्रत्यक्ष शिष्या आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी का वर्ष 2026 का चातुर्मास देहरादून में संपन्न होने जा रहा है।
इसी संदर्भ में गुरुवार को स्थानीय जैन भवन,गांधी रोड पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें चातुर्मास के उद्देश्य, धार्मिक महत्व तथा आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम और साधना का महापर्व है। उन्होंने कहा कि जब लोग चातुर्मास में आएंगे, देखेंगे और सुनेंगे, तब उन्हें चातुर्मास की वास्तविक महत्ता, स्थापना दिवस की गरिमा, इसकी संपूर्ण प्रक्रिया, दीक्षा दिवस के कार्यक्रम तथा जैन धर्म में चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व का प्रत्यक्ष अनुभव होगा। माताजी ने जैन समाज को संदेश देते हुए कहा कि जीवन क्षणभंगुर है और प्रत्येक क्षण अमूल्य है, इसलिए जितना अधिक धर्मार्जन करेंगे, वही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीवन में रहते हुए भी प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक समय धर्म, साधना और आत्मकल्याण के लिए देना चाहिए। साथ ही समाज के सभी लोगों से आपसी मतभेद और बैर भाव समाप्त कर एकजुट होकर समाज को सशक्त बनाने तथा संयम और साधना की इस पावन गंगा में सहभागी बनने का आह्वान किया। पत्रकार वार्ता के दौरान चातुर्मास समिति के चेयरमैन राजीव जैन ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 2 अगस्त को मंगल कलश स्थापना का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात 16, 17 एवं 18 अगस्त को दीक्षा दिवस सहित अनेक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
जितना अधिक धर्मार्जन करेंगे, वही जीवन में सुख, शांति का आधार बनेगाः माता आर्यिका